जीवनगढ़ स्थित संत निरंकारी भवन में सत्संग का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में आसपास क्षेत्र के लोग पहुंचे थे। सत्संग में देहरादून से आए ज्ञान प्रचारक राजीव ने ब्रह्मज्ञान के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि सतगुरु ने ब्रह्म ज्ञान प्रदान करने से पहले पांच प्रण लिए हैं। उन्होंने कहा कि पहला प्रण तन, मन, धन निरंकार प्रभु का है और इसे प्रभु का ही समझकर इस्तेमाल करना है। दूसरा प्रण जातपात को नहीं मानना है, क्योंकि प्रभु ने हमें मानव बनाकर धरती पर भेजा है।
